Wednesday, August 16, 2023

भगवान जगदीश (विष्णु जी) की पूजा और आरती करने की विधि


                        


💐भगवान जगदीश (विष्णु जी) की पूजा और 

आरती करने की विधि🪔

     भगवान जगदीश (विष्णु जी) की पूजा और आरती करने की विधि सरल है और इसे पूरी श्रद्धा और भक्ति से करना चाहिए। यहां पूजा की पूरी प्रक्रिया दी गई है

भगवान जगदीश की पूजा की विधि:🪔

1. पूजा स्थान की तैयारी:💐🪔

घर का पूजा स्थान साफ-सुथरा करें।

भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।

दीपक, धूपबत्ती, फूल, अक्षत (चावल), जल, फल, मिठाई, तुलसी के पत्ते, और गंगाजल तैयार रखें।

2. स्वयं की शुद्धता:-🪔

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

मन में भगवान विष्णु का ध्यान करें और पूजा शुरू करें।

3. दीप 🪔प्रज्वलित करें:💐

पूजा स्थान पर दीपक जलाएं।

घी या तेल का दीपक और धूपबत्ती भगवान के सामने रखें।

4. भगवान को स्नान कराएं (कल्पना में):-🪔

भगवान को गंगाजल, दूध और शुद्ध जल से स्नान कराने की भावना करें।

5. पूजन सामग्री अर्पित करें:-🪔

भगवान को चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी के पत्ते और माला अर्पित करें।

मिठाई और फल का भोग लगाएं।

6. ध्यान और मंत्र:-🪔

विष्णु जी का मंत्र  जाप करें:

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।"

कम से कम 108 बार जप करें या जितना समय संभव हो।

7. आरती करें:-

दीपक को भगवान के सामने घुमाते हुए आरती गाएं।

आरती के दौरान शंख और घंटी बजाएं।

आरती के बाद सभी को आरती की लौ का प्रकाश सिर पर लगाना चाहिए।

8. आरती के बाद प्रसाद वितरण:-🥭

भगवान को अर्पित प्रसाद सभी भक्तों में बांटें।

"जय जगदीश हरे" आरती गाने की विधि:

जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे॥ जय जगदीश हरे॥

आरती गाने की विधि:धूप-दीप जलाकर भगवान के समक्ष आरती करें।घंटी और शंख का उपयोग करें।

पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ इसे गाएं।

यह आरती भगवान विष्णु की कृपा और शांति प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है।

         🌞भगवान जगदीश (श्री विष्णु) की आरती :🌞

जय जगदीश हरे जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,

क्षण में दूर करे॥ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।

स्वामी दुःख बिनसे मन का।

सुख संपत्ति घर आवे, सुख संपत्ति घर आवे,

कष्ट मिटे तन का॥ जय जगदीश हरे॥

मात-पिता तुम्ह मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा,

आस करूं मैं जिसकी॥ जय जगदीश हरे॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।

स्वामी तुम अंतर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर,

तुम सबके स्वामी॥ जय जगदीश हरे॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।

स्वामी तुम पालनकर्ता।

मैं मूढ़ कृतघ्न खल, मैं सेवक तुम्हरा,

क्षण-क्षण ध्यान धरता॥ जय जगदीश हरे॥

इस आरती का गायन श्रद्धा और भक्ति से करने पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

आरती के बाद भगवान विष्णु की स्तुति इस प्रकार है: 

आरती के बाद भगवान विष्णु की स्तुति करना पूजा का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह भगवान को धन्यवाद देने और उनकी कृपा प्राप्त करने का समय होता है। यहां भगवान विष्णु की एक सुंदर स्तुति प्रस्तुत है:

                     🪔भगवान विष्णु की स्तुति💐🪔

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।

लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

सच्चिदानंद रूपाय, विष्णवे सर्वसंपदे।

जगदाधार रूपाय, नारायणाय ते नमः॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव।

त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।

त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥

नमो भगवते वासुदेवाय।

अनन्त गुण संपन्नं नारायणं नमाम्यहम्।

विष्णुं सर्वेश्वरं देवं, वन्दे सर्व जगत् गुरुम्

                         

                 💐🪔स्तुति के बाद प्रार्थना:🙏👏


       हे भगवान विष्णु!आप सृष्टि के पालनकर्ता हैं।हम सभी आपके    शरणागत हैं।हमारे सभी कष्टों का नाश करें और हमें मोक्ष प्रदान करें।आपकी कृपा से हमारे जीवन में शांति और समृद्धि बनी रहे।

                          ओम शांतिः शांतिः शांतिः।

स्तुति और प्रार्थना के बाद कुछ क्षण शांति में बैठकर भगवान का ध्यान करें।


                  💐ओम नमो भगवते वासुदेवाय।💐

        


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